चौराहे बन जाते हैं मंच... मोबाइल युग में जिंदा है भरतपुर की विरासत, ‘गोठ’ में बुजुर्गों संग गूंजते हैं ब्रज गीत

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Bharatpur Goth Parampara: भरतपुर जिले में प्रचलित ‘गोठ’ परंपरा आज भी ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है. गर्मियों के दिनों में गांवों के चौक, चबूतरों और खुले स्थानों पर शाम ढलते ही लोग एकत्रित होते हैं और ब्रज-भक्ति गीतों का सामूहिक गायन करते हैं. विशेष रूप से गुर्जर समाज के बुजुर्ग इस परंपरा को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उनके साथ युवा और बच्चे भी शामिल होकर सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं. गोठ केवल गीत-संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सामुदायिक एकजुटता का भी माध्यम है. ब्रज भाषा में गाए जाने वाले भक्ति गीत गांव के वातावरण को आध्यात्मिक रंग से भर देते हैं. आधुनिक जीवनशैली और तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े हुए है.   Read More ...

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