अदालत धर्म की परिभाषा तय नहीं कर सकती, सबरीमाला पर सिंघवी की दलील, CJI सूर्यकांत की बेंच में तीखी बहस

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धार्मिक मामलों में अदालती दखल पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने गैर-विश्वासियों द्वारा दायर पीआईएल पर भी कड़ा सवाल उठाया है. बिना आस्था वाले लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई का कोई तुक नहीं है. धार्मिक मामलों में पीआईएल स्वीकार करने के नियम बहुत सख्त होने चाहिए. अदालतें सिर्फ उन मामलों में दखल दे सकती हैं जहां जान को खतरा हो.   Read More ...

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