12 वीं तक गीता, वेद, धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के बाद, 9 साल तक गहन अध्ययन के साथ तपस्या, तब बनते हैं आचार्य, जाने पूरी प्रक्रिया

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अयोध्या सहित पूरे देश में पुरोहित आचार्य और ज्योतिषाचार्य बनने की परंपरा सदियों पुरानी है. यह केवल एक पेशा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति धर्म और परंपराओं के संरक्षण और प्रचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है. आचार्य समाज को न केवल धार्मिक मार्गदर्शन देते हैं बल्कि नई पीढ़ी को संस्कार, ज्ञान और जीवन मूल्यों से भी जोड़ते हैं. आचार्य बनने की प्रक्रिया आसान नहीं होती. इसके लिए बचपन से ही संस्कृत भाषा और शास्त्रों के अध्ययन की नींव रखी जाती है.   Read More ...

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