Video: चंपारण के मर्चा धान का ग्लोबल जलवा! GI टैग ने बदली किसानों की किस्मत, अमेरिका-दुबई भी हुए इसके मुरीद
West Champaran Marcha Rice GI Tag: बिहार के पश्चिम चंपारण की मिट्टी का काला हीरा कहे जाने वाले मर्चा धान ने अपनी खुशबू से अब सात समंदर पार तक धाक जमा ली है. महज दो साल पहले गुमनामी में जी रहे इस धान की किस्मत 2023 में मिले GI टैग ने ऐसी बदली कि आज इसकी कीमत और डिमांड दोनों आसमान छू रहे हैं. चनपटिया और नरकटियागंज समेत जिले के मात्र छह प्रखंडों में उपजने वाला यह धान अपनी सुपाच्यता और अनोखी खुशबू के लिए मशहूर है. GI टैग मिलने से पहले जो चिउड़ा 40-50 रुपये किलो बिकता था, आज उसकी कीमत 150 रुपये के पार पहुंच गई है. खास बात यह है कि वैज्ञानिकों के अनुसार, मर्चा धान का असली स्वाद और खुशबू सिर्फ इसी क्षेत्र की मिट्टी में संभव है. किसानों के अनुसार अब अमेरिका और दुबई जैसे देशों से भी इसकी मांग आ रही है. यही वजह है कि साल 2025 में मर्चा धान की खेती का रकबा बढ़कर 1000 एकड़ के पार निकल गया है. आनंद कुमार सिंह जैसे प्रगतिशील किसान अब इसे सिर्फ फसल नहीं, बल्कि बिहार की ग्लोबल पहचान मान रहे हैं. Read More ...
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