गोरखपुर की पहचान सिर्फ गोरखनाथ मंदिर और नाथ पंथ तक सीमित नहीं, पाल काल, बौद्ध परंपरा और प्राचीन अवशेष बनाते हैं खास

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त्तर प्रदेश का गोरखपुर सिर्फ धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर अपने भीतर कई ऐतिहासिक कालखंडों की परंपराओं और संस्कृतियों को भी समेटे हुए है. आज गोरखनाथ मंदिर की वजह से दुनिया भर में पहचान रखने वाला यह शहर कभी पाल काल, बौद्ध परंपरा और प्राचीन सभ्यताओं का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. शहर के अलग-अलग हिस्सों में मिलने वाली प्राचीन मूर्तियां, स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक अवशेष इस बात की गवाही देते हैं कि गोरखपुर का इतिहास बेहद समृद्ध और बहुआयामी रहा है.   Read More ...

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