PHOTO: विदाई का बदलता दौर.. अब तस्वीरों में कैद हो गई वो डोली की खनक, चार कंधों से चार पहियों ने ले ली जगह
Tradition of Vidai with doli: कभी गांव की गलियों में शादी के बाद डोली उठते ही माहौल बदल जाता था. आंगन में रोती मां, चुप खड़े पिता, सिसकती सहेलियां और कहारों के कंधों पर बैठी बेटी. यह सिर्फ विदाई नहीं, पूरे परिवार की भावनाओं का सबसे भारी पल होता था. डोली के हर कदम के साथ बचपन पीछे छूटता जाता था और नई जिंदगी की दहलीज करीब आती थी. लेकिन समय बदला, रास्ते बदले और रस्में भी बदल गईं अब डोली की जगह सजी हुई कारों ने ले ली है.विदाई तो आज भी होती है, आंसू भी बहते हैं, मगर कहारों की आवाज, डोली की खनक और उस पल की मिट्टी से जुड़ी आत्मीयता कहीं गुम सी हो गई है. आज की पीढ़ी तस्वीरों में डोली देखती है, जबकि बुजुर्ग उसे अपनी आंखों से जिया हुआ सच बताते है. Read More ...
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Riding the main trail was easy, a little bumpy because my mountain bike is a hardtail