250 साल पुराना है गोंडा का ये हनुमानगढ़ी मंदिर, पहले होती थी पिंडी की पूजा, रोचक है इसका इतिहास

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बलराम दास ने बताया कि इस स्थान पर पहले पिंडी रूप में पूजा की जाती थी और जो पूजा करते थे वह प्रत्येक मंगलवार को अयोध्या के हनुमानगढ़ी हनुमान जी का दर्शन करने जाते थे. अचानक उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और वह अयोध्या जाने में असमर्थ हो गए, और एक दिन उनके सपने में हनुमान जी स्वयं आकर बताते हैं कि जिस स्थान पर आप पिंडी रूप में पूजा करते हैं. उस स्थान के नीचे हमारा स्वरूप विराजमान है. उसे मिट्टी के पिंडी को हटाइए मिट्टी के पिंडी को हटाने के बाद बैठे हुए हनुमान जी की स्वरूप बाहर निकाला तभी से यहां पर हनुमान जी की पूजा की जाती है.   Read More ...

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