सत्याग्रह का रास्ता चुनेंगे अरविंद केजरीवाल! अब नहीं होंगे जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में पेश

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Arvind Kejriwal Vs Justice Swarna Kanta:अरविंद केजरीवाल ने बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है. उन्होंने साफ कह दिया है कि वो जस्टिस स्वर्ण कांता की कोर्ट में न तो खुद पेश होंगे और न ही उनकी तरफ से कोई वकील पैरवी करेगा. ये पूरा मामला शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसमें पहले निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था. लेकिन अब जांच एजेंसियां इस मामले को आगे बढ़ाते हुए कोर्ट तक पहुंची हैं, और इसी केस की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता की कोर्ट में हो रही है. केजरीवाल का कहना है कि इस केस में ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ की स्थिति बन रही है. उन्होंने दावा किया कि सरकारी वकीलों के केस अलॉटमेंट को लेकर कुछ ऐसे पहलू हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें पूरी न्यायपालिका पर भरोसा है और वह उसका सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि जब उन्हें पहले झूठे केस में फंसाया गया था, तब इसी न्यायपालिका ने उन्हें न्याय दिया. लेकिन इस खास मामले में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता है। इसी वजह से उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता से अनुरोध किया था कि वे इस केस से खुद को अलग कर लें, लेकिन कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया. इसके बाद केजरीवाल ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते का जिक्र करते हुए कहा कि जब सभी प्रयासों के बाद भी न्याय नहीं मिले, तो शांतिपूर्ण विरोध का रास्ता अपनाना चाहिए. उन्होंने इसी भावना के साथ कोर्ट में पेश न होने का फैसला लिया है. केजरीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह कदम किसी विरोध या अहंकार में नहीं है, बल्कि इसका मकसद न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखना है. उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट इस मामले में कोई फैसला सुनाता है, तो वे कानूनी तरीके से उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.   Read More ...

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