फर्रुखाबाद के कारीगरों की पहचान बनी ‘डलिया’, बढ़ती लागत और घटती आमदनी से जूझती पीढ़ियों पुरानी परंपरा!

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फर्रुखाबाद के कारीगरों की पारंपरिक ‘डलिया’ अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण लंबे समय से पहचान बनाए हुए है. अरहर, बहेड़ा और शहतूत की लकड़ी से तैयार की जाने वाली यह डलिया घरों से लेकर खेतों तक उपयोग में लाई जाती है. ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना से कारीगरों को कुछ सहारा जरूर मिला है, लेकिन कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत ने उनके सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.   Read More ...

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